वैद्यराज नमस्तुभ्यम।।।

वैद्यराज नमस्तुभ्यं यमराजसहोदर ।
यमस्तु हरति प्राणान् वैद्यो प्राणान् धनानि च ॥

हे वैद्यराज, यम के भाई, मैं आपको प्रणाम करता हूँ .यम तो सिर्फ प्राण हर लेते है पर आप धन और प्राण दोनों हर लेते हो !!
O vaidya (doctor), brother of Yama(God of Death), I bow down of you. Yama only steals away one’s life, but the vaidya steals one’s life as well as money.

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कोऽन्धो योऽकार्य

कोऽन्धो योऽकार्यरतः
    को बधिरो यो हितानि न श्रुणोति ।
को मूको यः काले
    प्रियाणि वक्तुं न जानाति ॥

He is blind who is busy in wrong deeds. He is deaf who does not heed to good advice. He is dumb who does not know to tell good words at the right time.

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जीवनं तर्पण

#WorldWaterDay
#SaveWater
जीवनं तर्पणं हृद्यं ह्रादि बुद्धिप्रबोधनम् । तन्वव्यक्तरसं मृष्टं शीतं लघ्वमृतोपमम् ।।
गंगाम्बु नभसो भ्रष्टं स्पृष्टं त्वर्केन्दुमारुतैः । हिताहितत्वे तद्भूयो देशकालावपेक्षते ।।”
(अष्टांगहृदयम्–5.1-2)

आकाश से गिरा हुआ गंगा का जल जीवन , तर्पण, हृदयहितकारक, आनन्दायक, बुद्धि को बढाने वाला, तनु , अव्यक्त रस , मृष्ट, शीतल, हलका और अमृतसमान  होता है । यह जल सूर्य, चन्द्र तथा वायु के स्पर्श  से देश एवं काल प्रभाव से हितकर या अहितकर भी हो सकता है !

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कोटरान्तः स्थिते

कोटरान्तः स्थिते वन्हिस्तरुमेकं दहेत्खलु  |
कुपुत्रस्तु  कुले  जातः स्वकुलं नाशयेत्यहो  ||
सुभाषितरत्नाकर

Meaning:
Oh ! while a fire inside a hollow of a tree burns only that tree,
even one wicked and aberrant son born in a family ruins the entire household.

एक वृक्ष के भीतर लगी आग सिर्फ उसी वृक्ष को नष्ट करती है न की वृक्ष के संपूर्ण कुल का ! परंतु एककुल में उत्पन्न कुपुत्र संपूर्ण कुल का नाश कर देता है !

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छायां ददाति शशिचन्दनशीतलां यः

छायां ददाति शशिचन्दनशीतलां यः सौगन्धवन्ति सुमनांसि मनोहराणि ।
स्वादूनि सुन्दरफलानि च पादपं तं छिन्दन्ति जाङ्गलजना अकृतज्ञता हा ।।

जो वृक्ष चंद्रकिरणों तथा चंदन के समान शीतल छाया प्रदान करते है, सुन्दर एवं मनमोहक पुष्पों से वातावरण सुगंधी बनाते है, आकर्षक एवं स्वादिष्ट फलों को मनुष्यो पर न्यौछावर करते है, उस वृक्ष को जंगली असभ्य लोग निर्दयता से काट डालते हैं । अहो मनुष्य की यह कैसी कृतघ्नता (अकृतज्ञता) है ??

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पुष्पिताः फलवन्तश्च

पुष्पिताः फलवन्तश्च तर्पयन्तीह मानवान् ।
वृक्षदं पुत्रवत् वृक्षास्तारयन्ति परत्र च ॥
~महाभारत, अनु

फल और फूलोंवाले वृक्ष मनुष्यको तृप्त करते है । वृक्ष देनेवाले अर्थात वृक्षरोपन व संवर्धन करने वाले मनुष्य का तारण परलोकमे भी करते है।

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सेवितव्यो महावृक्ष:

सेवितव्यो महावृक्ष: फलच्छाया समन्वित: ।
यदि दैवाद् फलं नास्ति, छाया केन निवार्यते ॥

अर्थ: – फल और छाया देनेवाले महान् वृक्ष की सेवा  अर्थात   वृक्षारोपण  तथा उसका संरक्षण करना चाहिए , यदि अपने भाग्य में फल नहीं आये तो छाया कौन लेकर जा  सकता है ?

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सेवितव्यो महावृक्ष: फलच्छाया समन्वित: ।
यदि दैवाद् फलं नास्ति, छाया केन निवार्यते ॥12॥

अर्थ: – फल और छाया देनेवाले महान् वृक्ष की सेवा अर्थात वृक्षारोपण तथा उसका संरक्षण करना चाहिए , यदि अपने भाग्य में फल नहीं आये तो छाया कौन लेकर जा सकता है ?

कोकिलानम् स्वरो ….

कोकिलानम् स्वरो रूपं स्त्रीणां रूपं पतिव्रतम् |
विद्या रूप कुरुपाणां क्षमा रूपं तपस्विनाम् ||

Meaning:

A cuckoo is recognized by its sweet voice, a woman by her fidelity toward husband , ugly looking persons get recognition by his knowledge, and sages by their (forgiveness) patience & rigorous self discipline..
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धनानि  जीवितं चैव

धनानि  जीवितं चैव  परार्थे  प्राज्ञ  उत्सृजेत्  |

तन्निमित्तो वरं त्यागो विनाशे नियते सति  ||
Meaning:

A wise and wealthy person should always give away his wealth for saving the lives of needy people.  It is preferable to spend it for such noble cause, because ultimately all wealth is destined to be destroyed..

मन्दोऽप्यमन्दतामेति संसर्गेण विपश्चितः

मन्दोऽप्यमन्दतामेति संसर्गेण विपश्चितः।

पङ्कच्छिदः फलस्येव निकषेणाविलं पयः॥ 
हिन्दी:

बुद्धिमानों के साथ से मंद व्यक्ति भी बुद्धि प्राप्त कर लेते हैं जैसे रीठे के फल से उपचारित गन्दा पानी भी स्वच्छ हो जाता है॥ 
English:

Even a dull person becomes sharp by keeping company with the wise, as turbid water becomes clear when treated with the dust-removing fruit of ‘Reetha’.