पुस्तकं वनिता वित्तं परहस्तगतं गतम् ।

यदि चेत्पुनरायाति नष्टं भ्रष्टं च खण्डितम् ॥

पुस्तक, वनिता, और वित्त, परायों के पास जाने पर वापस नहीं आते; और यदि आते भी है, तो नष्ट, भ्रष्ट और खंडित होकर आते हैं ।

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