#WorldWaterDay
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जीवनं तर्पणं हृद्यं ह्रादि बुद्धिप्रबोधनम् । तन्वव्यक्तरसं मृष्टं शीतं लघ्वमृतोपमम् ।।
गंगाम्बु नभसो भ्रष्टं स्पृष्टं त्वर्केन्दुमारुतैः । हिताहितत्वे तद्भूयो देशकालावपेक्षते ।।”
(अष्टांगहृदयम्–5.1-2)

आकाश से गिरा हुआ गंगा का जल जीवन , तर्पण, हृदयहितकारक, आनन्दायक, बुद्धि को बढाने वाला, तनु , अव्यक्त रस , मृष्ट, शीतल, हलका और अमृतसमान  होता है । यह जल सूर्य, चन्द्र तथा वायु के स्पर्श  से देश एवं काल प्रभाव से हितकर या अहितकर भी हो सकता है !

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