सेवितव्यो महावृक्ष: फलच्छाया समन्वित: ।
यदि दैवाद् फलं नास्ति, छाया केन निवार्यते ॥

अर्थ: – फल और छाया देनेवाले महान् वृक्ष की सेवा  अर्थात   वृक्षारोपण  तथा उसका संरक्षण करना चाहिए , यदि अपने भाग्य में फल नहीं आये तो छाया कौन लेकर जा  सकता है ?

image
सेवितव्यो महावृक्ष: फलच्छाया समन्वित: ।
यदि दैवाद् फलं नास्ति, छाया केन निवार्यते ॥12॥

अर्थ: – फल और छाया देनेवाले महान् वृक्ष की सेवा अर्थात वृक्षारोपण तथा उसका संरक्षण करना चाहिए , यदि अपने भाग्य में फल नहीं आये तो छाया कौन लेकर जा सकता है ?

Advertisements