पुष्पिताः फलवन्तश्च तर्पयन्तीह मानवान् ।
वृक्षदं पुत्रवत् वृक्षास्तारयन्ति परत्र च ॥
~महाभारत, अनु

फल और फूलोंवाले वृक्ष मनुष्यको तृप्त करते है । वृक्ष देनेवाले अर्थात वृक्षरोपन व संवर्धन करने वाले मनुष्य का तारण परलोकमे भी करते है।

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