छायां ददाति शशिचन्दनशीतलां यः सौगन्धवन्ति सुमनांसि मनोहराणि ।
स्वादूनि सुन्दरफलानि च पादपं तं छिन्दन्ति जाङ्गलजना अकृतज्ञता हा ।।

जो वृक्ष चंद्रकिरणों तथा चंदन के समान शीतल छाया प्रदान करते है, सुन्दर एवं मनमोहक पुष्पों से वातावरण सुगंधी बनाते है, आकर्षक एवं स्वादिष्ट फलों को मनुष्यो पर न्यौछावर करते है, उस वृक्ष को जंगली असभ्य लोग निर्दयता से काट डालते हैं । अहो मनुष्य की यह कैसी कृतघ्नता (अकृतज्ञता) है ??

image

Advertisements